पृथ्वीराज चौहान का इतिहास [Story, Wife, Death] | Prithviraj Chauhan History Hindi

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Prithviraj Chauhan का नाम आज हर कोई जानता है ये ऐसे योद्धा है जो अकेले ही 17 बार युद्ध में विजय हासिल किया इनका जन्म 1168 में राजस्थान में हुआ था और इनकी जीवन काल लगभग 43 वर्षो का रहा।

इनके पिता जी सोमेशवर चौहान और माताजी कपुरीदेवी थे। पृथ्वीराज मात्र 13 वर्ष की उम्र में अजमेर का गद्दी संभाला था और बाद में दिल्ली का भी उतरादिकारी बन गया था। इनकी पत्नी का नाम संयोजिता ( पिता जयचंद्र)।

18 वीं युद्ध में छल से 1191 में मोहम्मद गोरी द्वारा इनकी पराजय हुई और उसके बाद इनको बंदी बना लिया गया फिर छलपूर्वक 1192 में पृथ्वीराज की मृत्यु हो गई।

 पृथ्वीराज चौहान का इतिहास | Prithviraj Chauhan History In Hindi

Prithviraj Chauhan History In Hindi

परवरिश और विद्या

इनका जन्म 1168 में अजमेर राजस्थान में हुआ Prithviraj Chauhan शुरू से ही पराक्रमी और निडर बालक था इनके पिता सोमेश्वर चौहान और माता कपूरी देवी जो अजमेर का शासक रहा है ने इनकी देखरेख की और बचपन से ही पृथ्वीराज शब्दभेदी विद्या सिख लिये।

इनमें पहले बचपन से ही योद्धाओ वाला गुण था वीर साहसी शत्रु से ना डरना और भी गुण जो एक पराक्रमी राजा और योद्धा में होता है।

तभी तो इनके इसी गुण को देखते हुए इन्हें मात्र 13 वर्ष की आयु में अजमेर का राजा बना दिया जाता है। उसके कुछ दिन बाद इन्हें दिल्ली का भी उत्तराधिकारी घोषित कर दिया जाता है।

वैवाहिक जीवन और मित्र

जब Prithviraj Chauhan दिल्ली का उत्तराधिकारी बनता है फिर जयचंद्र की बेटी की स्वयंबर में पृथ्वीराज संयोजिता से विवाह कर लेता है जो की उनके पिता जयचंद्र को पसंद नहीं आता तो कुछ दिनों बाद जयचंद्र और पृथ्वीराज में दुश्मनी हो जाती है।

चौहान का एक परम मित्र चंदबरदाई जो भाई से भी बढ़कर था इनका हर समय साथ दिया इनका आपको आगे भी योगदान देखने को मिलेगा।

Prithviraj Chauhan और Mohammad Gori का युद्ध

पृथ्वीराज एक महान योद्धा होने के साथ इनके पास सेना की शक्ति भी अद्भुत थी इनके पास 3 लाख सैनिक और 300 हाथी थे जो की किसी को इनके साथ युद्ध करने में काफी बड़ी चुनौतीपूर्ण होती थी। तभी लगातार 17 बार युद्ध में विजयी रहे है।

जब ये अपना राज सँभाल रहे थे तभी मोहम्मद गोरी ने भारत पर आक्रमण कर दिया और बहुत जन धन की हानि हुई उसके बाद इन्होंने पृथ्वीराज चौहान पर भी आक्रमण कर दिया लेकिन इस युद्ध में मोहम्मद गोरी की हार हुई और पृथ्वीराज चौहान जीत हासिल किया।

लेकिन कुछ दिन बाद मुहम्मद गोरी इस हार का बदला लेना चाहते थे पर उसको पता था की Prithviraj Chauhan से युद्ध में जीतना संभव नहीं है फिर उन्होंने छलकपट का सहारा लिया।

कुछ दिन बाद पता चला की जयचंद्र उनका दुश्मन है क्योकि उनकी बेटी संयोजिता का विवाह पृथ्वीराज से हुआ था और उसके बाद से दोनों में दुश्मनी हो गई।

इसी का सहारा लेते हुए मोहम्मद गोरी 1191 में जयचंद्र के साथ मिलकर वो भी छलकपट से पंजाब के सरहिंद के ताईवान में आक्रमण कर दिया और इसमें पृथ्वीराज चौहान की हार हुई और मोहम्मद गोरी की जीत हुई लेकिन ये युद्ध छलकपट का था बाकि ऐसे हराना मुश्किल था।

उसके बाद पृथ्वीराज चौहान और उनके दोस्त चंदबरदाई को बंदी बना लिया गया और दोनों को घसीटते हुए अफगानिस्तान ले जाया गया और कई यातनाये इनको झेलनी पड़ी यहाँ तक की पृथ्वीराज के आँख में गर्म सरिया डालकर दोनों आँखों से अँधा कर दिया।

उसके बाद मुहम्मद गोरी ने इनको आखिरी इच्छा पूछी तो इनके दोस्त ने इनको बाण चलाने का इच्छा जाहिर किया तो कहते है की चौहान का बाण कभी चुकता नहीं था इसी के चलते राजा ने अपने ऊपर बाण चलाने को कहा लेकिन इनको आँख से तो अँधा कर दिया था फिर भी पृथ्वीराज चौहान ने राजा के ऊपर बाण चला दिया और मुहम्मद गोरी की वही मृत्यु हो गई।

फिर पृथ्वीराज और चंदबरदाई ने 1192 में अपने ऊपर चाकू चला दिया और मृत्यु हो गई जिससे वो शत्रु के हाथ नहीं आ पाये।

तो कैसी लगी Prithviraj Chauhan History In Hindi मे और पूरी  कहानी इतिहास हमें जरूर बताये और हो सके तो अपने दोस्तों के साथ जानकारी शेयर भी करे ।

आपका प्रेमपूर्वक धन्यवाद,

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